बात इतनी सी नहीं हँस के उड़ा दी जाए
बात उतनी भी नहीं दिल से लगाई जाए
बे-वफ़ा मुझ से मिला तोड़ने बातों से दिल
साथ वा'दा भी लिया बात छुपाई जाए
मैं ने आँखों की ज़बाँ में की थी बातें उस से
बन के नादाँ वो कहे खुल के बताई जाए
मैं ने मिलने को कहा शाम बिताने ख़ातिर
देख कर लौट गया बात न ख़ाली जाए
पहले दीवार गिराई थी मिरे आँगन की
अब वो कहता है कि दूरी न घटाई जाए
उस ने हर बार था पैग़ाम दिया प्यारा सा
कह रहा आज मुझे बात दबाई जाए
दिल की दीवार पे तस्वीर लगी है उस की
बोलता है कि वो तस्वीर हटाई जाए
— arjun chamoli















