देख ले ख़ुद तू, हम-नज़र न छुपी
आरज़ू दिल की चाह कर न छुपी
दिल ने पहरे लगाए थे लेकिन
उड़ गई प्यार की ख़बर, न छुपी
मानता हूँ मैं, तू छुपा लेगा
यह लगी दिल की भी अगर न छुपी
लाख ढाँपी गई थी परदों में
थी सहर की किरन नज़र न छुपी
'इश्क़ में बे-वफ़ाई ए पैहम
हम छुपाया किए मगर न छुपी
वारदात ए शबे-सियाह, चराग़!
थी अयाँ वह दम ए सहर न छुपी
तेरी यादों से नम हुई ऐसे
ग़मज़दा दिल से चश्म तर न छुपी
ये मिरे क़त्ल की ख़ता, 'साहिल'
ले तेरे आ गई है सर, न छुपी
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