deti hai gala kat ke jo dastaar shahaadat | देती है गला कट के जो दस्तार शहादत

  - A R Sahil "Aleeg"

देती है गला कट के जो दस्तार शहादत
रखती है उसी का ही ये मेयार शहादत

इक मुल्क बचाने में गिरे लाशें हज़ारों
इस पार शहादत है तो उस पार शहादत

ईमान से मिट्टी से फ़राइज़ से वफ़ा से
होती ही नहीं यार सुबुक- बार शहादत

आई जो कभी आँच तिरंगे की अना पर
हम ने भी मुसलसल दी धुआँ- दार शहादत

तेरा भी यही मुल्क है मेरा भी यही मुल्क
कम तुझसे नहीं दी है हर इक बार शहादत

निय्यत में भला जिस की हो सौदा-ए-वतन बस
क्या देगा भला देख वो ग़द्दार शहादत

आती है हमें याद वो तक़सीम-ए-वतन अब
बुनियाद रही जिस की लहू-बार शहादत

जज़्बा हो अगर दिल में तो मिट जाओ वतन पर
अब भी है शहीदों की तलबगार शहादत

साहिल ये सियासत है इसे ख़ाक है मतलब
वोटों के लिए सिर्फ़ है हथियार शहादत

  - A R Sahil "Aleeg"

Pollution Shayari

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