छोड़ देता है जब शराफ़त ''इश्क़
करने लगता है तब बग़ावत ''इश्क़
'इश्क़ के भी अजीब क़िस्से हैं
वस्ल है 'इश्क़ गर तो फ़ुर्क़त ''इश्क़
बेवफ़ा अपने सब दलाइल रख
अब करेगा मेरी हिमायत ''इश्क़
हम को मारेगा क्या कोई दुश्मन
ख़ुद-ब-ख़ुद अपनी है अदावत ''इश्क़
सारी दुनिया की है ज़रूरत ये
फिर भी दुनिया की है शिकायत ''इश्क़
'इश्क़ ही एक ऐसा मज़हब है
ख़ुद ख़ुदा भी है और इबादत ''इश्क़
कोशिशें लाख हम ने की साहिल
बन न पाया हमारी क़िस्मत 'इश्क़
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