थोड़ी ख़ुशियाँ मलाल ज़्यादा हैमुझ से ये ही सवाल ज़्यादा हैहिज्र है ग़म है दर्दो ज़िल्लत भीदेखिए ये वबाल ज़्यादा है— A R Sahil "Aleeg"