प्यार का वा'दा करने वाले
मेरे स्वप्न कतरने वाले
मुझ को देकर चले गए हैं
सारे ज़ख़्म अखरने वाले
आँखों में जब नहीं चढ़े वो
दिल में कहाँ उतरने वाले
खेल को आधा छोड़ गए हैं
शय औ मात से डरने वाले
जीना हर दिन सीख रहे थे
मौत से पहले मरने वाले
बिगड़े ही जब नहीं सही से
फिर क्या ख़ाक सुधरने वाले
टूटे तो बरसों से हैं वो
जो हैं आज बिखरने वाले
भाई साहब आ गए हैं तो
बैठ गए हैं धरने वाले
— Aryan Mishra















