mausam par man ka koi adhikaar nahin | मौसम पर मन का कोई अधिकार नहीं

  - Ashok Rawat

मौसम पर मन का कोई अधिकार नहीं
बादल हैं पर बारिश के आसार नहीं

बस्ती में कुछ लोग न मारे जाते हों
याद हमें ऐसा कोई त्यौहार नहीं

प्यार-मोहब्बत सीधे-सादे रस्ते हैं
कोई इन पर चलने को तैयार नहीं

सब मन की कमजोरी होती है वरना
गिर न सके ऐसी कोई दीवार नहीं

लोगों से उम्मीद नहीं सच बोलेंगे
सच सुनने को जब कोई तैयार नहीं

हार उसूलों की की ख़ातिर तो है मंजूर
जीत हमें पर शर्तों पर स्वीकार नहीं

जाने क्यूँँं अब शायर के होंठों पर भी
दिल को छू लेने वाले अश'आर नहीं

सब मन की कमजोरी होती है वरना
गिर न सके ऐसी कोई दीवार नहीं

लोगों से उम्मीद नहीं सच बोलेंगे
सच सुनने को जब कोई तैयार नहीं

हार उसूलों की की ख़ातिर तो है मंजूर
जीत हमें पर शर्तों पर स्वीकार नहीं

जाने क्यूँँं अब शायर के होंठों पर भी
दिल को छू लेने वाले अश'आर नहीं

  - Ashok Rawat

Dil Shayari

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