जहाँ सभी को ख़ुशी से गले लगाया गया
हमारा हाथ मिलाना हवस बताया गया
तुम्हारे आने से पहले खुला मकान था दिल
तुम्हारे बाद भी दरवाज़ा कब लगाया गया
भरोसा 'इश्क़ की पहली जवाबदारी है
गई जो धूप उधर तो इधर से साया गया
ज़ियादा रौशनी आँखें बुझा भी सकती थी
सो उसके आने से पहले दिया बुझाया गया
हमारी नफ़रतें दो-फाड़ कर गईं घर को
मगर ये फैसला दीवार का बताया गया
न एक पल को कभी दिल की राह सूनी हुई
तुम्हारे बाद तुम्हारा ख़याल आया-गया
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