
सुनाता हूँ ज़रा सुनना ये छोटी की कहानी है
किसी धनहीन पापा की ये बेटी की कहानी है
कहीं पर्वत चढ़ा कोई कहीं रस्सी पे नाचे दिन
वो चोटी की कहानी थी ये रोटी की कहानी है
— Saroj Kumar
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