मोहब्बत के ख़ातिर जो नीलाम हम थे
जवानी थी जिस वक़्त बदनाम हम थे
गवारा नहीं था उसे नाम सुनना
किसी क़ब्र पर वो लिखा नाम हम थे
न वो वक़्त लौटा न वो शख़्स लौटा
कभी जिस की यादों में गुमनाम हम थे
— Atif khan
जवानी थी जिस वक़्त बदनाम हम थे
गवारा नहीं था उसे नाम सुनना
किसी क़ब्र पर वो लिखा नाम हम थे
न वो वक़्त लौटा न वो शख़्स लौटा
कभी जिस की यादों में गुमनाम हम थे
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