mohabbat men jo dooba main to dil tujhko pukaara hai | मोहब्बत में जो डूबा मैं तो दिल तुझको पुकारा है

  - Aves Sayyad

मोहब्बत में जो डूबा मैं तो दिल तुझको पुकारा है
मेरी टूटी हुई कश्ती का तू ही तो सहारा है

रखा ख़ुद को यूँँ शीशे सा कि इबरत ले सभी मुझ सेे
किसी और पे न गुज़रे वो जो भी मैंने गुज़ारा है

लब उसके हैं गुलाबों से फिर उस पर ये खुली जुल्फ़ें
ये 'उम्र अपनी बिताने को हाँ काफ़ी ये नज़ारा है

मर अब जाए कहीं जा कर करे किस सेे शिक़ायत हम
ये ज़ाहिल ये सितमगर भी तो आख़िर को हमारा है

जो तन्हाई के तोहफ़े हैं सब उसकी ही बदौलत हैं
किताबों का जो पर्वत है ये जो टूटा सितारा है

लगाया पहले सीने से कहा घबरा कर उसने फिर
मुझे रुसवा न कर देना यूँँ तो सब कुछ गवारा है

'अजब मेरी मुहब्बत है 'अजब मेरी ये क़िस्मत है
मिले जिस सेे भँवर मुझको वही मेरा किनारा है

इक ऐसा भी सफ़ीना था जो ग़र्क़ाब-ए-समंदर था
इक ऐसा भी समंदर है सफ़ीने से उतारा है

तेरे तफ़्सीले पैकर में क़सीदे हैं कसे मैंने
वरक़ तेरे बदन का ये इन आँखों का सिपारा है

जिसे सब सेे छुपाया है जो इस ग़म का मकीं भी है
वही है जान सय्यद की वही तो सब सेे प्यारा है

  - Aves Sayyad

Samundar Shayari

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