saath janmon ki hua karti thii nemat | सात जन्मों की हुआ करती थी नेमत

  - Aves Sayyad

सात जन्मों की हुआ करती थी नेमत
सात दिन में ही सिमट आई मुहब्बत

तुम मेरे यारों से ज़्यादा हो रकी़बों
जाने क्यूँ उसको बनाया ख़ूबसूरत

दिन के छप्पन कॉल फिर मैसेज दो सो
यार ये हर रोज़ क्या है तेरी आफ़त

'उम्र भर इक शख़्स को ही चाहा मैंने
मेरे जैसों से नहीं लेते हिदायत

ब्लॉक हूँ मैं, बात कैसे होती तुझ से
क्या ख़बर, तुझ को भला, क्या है शिकायत

जॉब तेरी, दोस्त तेरे, सब गए तो
अब लगा दो इस की भी मुझ पर ही तोहमत

चार दिन में हो गया है तू किसी का
माँगी थी मैंने महीने की तो मोहलत

तू पलट के आए तो ये याद रखना
मैं ही सय्यद हूँ, थी जिसकी फूटी क़िस्मत

  - Aves Sayyad

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