तुझे जब से उस पार देखा
मुझे सब ने बीमार देखा
यूँ तो देखी है दुश्मनी भी
मगर जो तेरा प्यार देखा
न हिम्मत हुई इश्क़ की फिर
पलट कर जो घर-बार देखा
कहीं भी न तुझ-सा हँसी और
न तुझ सेा अदाकार देखा
हवस जो उठी जिस्म के बीच
मोहब्बत को लाचार देखा
नई नस्ल का इश्क़ है ये
वफ़ा को तो बेकार देखा
तेरे बा'द भी तेरे पीछे
जहाँ को क़दम-वार देखा
बहुत देखी दुनिया प सय्यद
तुझे मिल के सय्यार देखा
— Aves Sayyad















