रंगों पे एहसान जताने वाला था
मैं तेरी तस्वीर बनाने वाला था
फिर सोचा जाने दे जाने वाले को
पहले मैं आवाज़ लगाने वाला था
उसी दिए ने हाथ जलाए हैं मेरे
तेज़ हवा से जिसे बचाने वाला था
इक मुद्दत से वो भी है बीमार पड़ा
उस घर में जो एक कमाने वाला था
अब 'जस्सर' जो मारा मारा फिरता है
कल तक तो वो ठौर-ठिकाने वाला था
— Avtar Singh Jasser















