तुम मुझे याद क्यूँँ नहीं करते
और बर्बाद क्यूँ नहीं करते
एक तुम ही तो यार हो मेरे
और तुम याद क्यूँ नहीं करते
तुम को मालूम है ना आज़ादी
तो फिर आज़ाद क्यूँ नहीं करते
शर्म आती है इन ज़बानो पर
तुम इन्हें साद क्यूँ नहीं करते
एक तू ही तो देने वाला है
तुम ये फरयाद क्यूँ नहीं करते
टूटे तारों की रौशनी में भी
घर को आबाद क्यूँ नहीं करते
इतने दुख दे के कौन जाता है
ग़म को मोताद क्यूँ नहीं करते
— Azeem Dehlvi















