barabar uske qad ke ab mira qad ho nahin saktaa | बराबर उसके क़द के अब मिरा क़द हो नहीं सकता

  - Dharmesh bashar

बराबर उसके क़द के अब मिरा क़द हो नहीं सकता
वो तुलसी हो नहीं सकता मैं बरगद हो नहीं सकता

मिटा दे लाँघ जाए या कि उसका अतिक्रमण कर ले
मैं ऐसी कोई भी कमज़ोर सरहद हो नहीं सकता

जमा कर अपने पैरों को चुनौती देनी पड़ती है
कोई बैसाखियों के दम पे अंगद हो नहीं सकता

कुसुम हाथों में उसके और बग़ल में हो छुरी तो फिर
फ़क़त सम्मान करना उसका मक़सद हो नहीं सकता

ख़ुशी का अर्थ क्या जाने वो मन की शांति क्या जाने
विहँसता देख बच्चों को जो बरगद हो नहीं सकता

'बशर' है कितना गहरा फ़र्क दोनों के मिज़ाजों में
वो अब सत हो नहीं सकता मैं अब बद हो नहीं सकता

  - Dharmesh bashar

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