meri raahon men koii phool bichaaya na karo | मेरी राहों में कोई फूल बिछाया न करो

  - Dharmesh bashar

मेरी राहों में कोई फूल बिछाया न करो
धूप का आदी हूँ मैं मुझ पे यूँँ साया न करो

दिल चुराया न करो ख़्वाब दिखाया न करो
यार अब तुम मेरी यादों में भी आया न करो

यूँँ हवाओं में मेरी बात उड़ाया न करो
फूँक कर ऐसे चराग़ों को बुझाया न करो

ये मुलाक़ात की घड़ियाँ हैं बहुत कम यूँँ भी
ख़्वाह मख़ाह रूठ के यूँँ वक़्त गँवाया न करो

घूमती रहती है गुस्ताख़ ज़माने की नज़र
खिड़कियाँ खोल के यूँँ सामने आया न करो

मुझको कलियों के मसलने का गुमाँ होता है
हर घड़ी दाँत से होंठों को दबाया न करो

हसरतें मोम के मानिंद पिघल जाएँगी
बेरुख़ी की ये कड़ी धूप दिखाया न करो

आस्तीनों में कहीं साँप पले होते हैं
हर बढ़े हाथ से तुम हाथ मिलाया न करो

लोग ख़ुद अपनी ही बद-शक़्ल से डर जाएँगे
आईना सबको सर-ए-आम दिखाया न करो

दोस्त बनने का नहीं होता सलीक़ा सब में
यूँँ दिल-ओ-जान 'बशर' सब पे लुटाया न करो

  - Dharmesh bashar

Aadmi Shayari

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