ye nemat bhi kisi se kam nahin hai | ये नेमत भी किसी से कम नहीं है

  - Dharmesh bashar

ये नेमत भी किसी से कम नहीं है
हमारे पास अपनी सर
ज़मीं है

मैं हिजरत कर गया हूँ बस्तियों से
मगर ये दिल मिरा अब तक वहीं है

ये मुझको रास आए या न आए
मगर इस शहर का मौसम हसीं है

तुम्हें क्यूँ बद-गुमानी हो रही है
मुझे तो इस मुहब्बत पर यक़ीं है

बला की फ़ुर्क़तें काटी हैं लेकिन
हमारा हौसला टूटा नहीं है

अगर मंज़िल न मिल पाए तो भी क्या
'बशर' ये रास्ता तो दिल-नशीं है

  - Dharmesh bashar

Aawargi Shayari

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