mirii ghazal ki tarah us ki bhi hukoomat hai | मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है

  - Bashir Badr

मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है
तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूबसूरत है

कभी कभी कोई इंसान ऐसा लगता है
पुराने शहर में जैसे नई इमारत है

जमी है देर से कमरे में ग़ीबतों की नशिस्त
फ़ज़ा में गर्द है माहौल में कुदूरत है

बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम
मुझे पता चला वो कितनी ख़ूबसूरत है

ये ज़ाइरान-ए-अली-गढ़ का ख़ास तोहफ़ा है
मिरी ग़ज़ल का तबर्रुक दिलों की बरकत है

  - Bashir Badr

Shahr Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Bashir Badr

As you were reading Shayari by Bashir Badr

Similar Writers

our suggestion based on Bashir Badr

Similar Moods

As you were reading Shahr Shayari Shayari