दिल में रक्खा फिर यकायक बे-दयार उस ने किया
ऐसा मेरे साथ जाने कितनी बार उस ने किया
देख कर भी मैं ने अनदेखा किया कितनी दफ़ा
और उधर कानों सुनी पर ए'तिबार उस ने किया
चाहता तो मार सकता था मुझे आसानी से
जाने क्यूँ दिल पर मेरे किश्तों में वार उस ने किया
ख़ुश्क होना आँखों का अच्छा नहीं लगता उसे
इस लिए आँखों को मेरी आबशार उस ने किया
— Karan Bedi















