दोस्ती क्या हुई तीरगी से
दुश्मनी हो गई रौशनी से
टूट सकता है रिश्ता कभी भी
बन नहीं पा रही ज़िंदगी से
उस का ये फ़ैसला भी सही है
घर कहाँ चलता है शा'इरी से
दिल किसी एक ने तोड़ा लेकिन
उठ गया है भरोसा सभी से
— Karan Bedi
दुश्मनी हो गई रौशनी से
टूट सकता है रिश्ता कभी भी
बन नहीं पा रही ज़िंदगी से
उस का ये फ़ैसला भी सही है
घर कहाँ चलता है शा'इरी से
दिल किसी एक ने तोड़ा लेकिन
उठ गया है भरोसा सभी से
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