मैं एक दिल के इतने ख़रीदार देख कर

घबरा गया हूँ रौनक़-ए-बाज़ार देख कर

कोई गवाह है ही नहीं आप के ख़िलाफ़
सकते में आ गया हूँ तरफ़दार देख कर

ता-उम्र मुझ को कोई सहारा न मिल सका
आँसू निकल पड़े हैं अज़ादार देख कर

जो लोग बोलते थे बिकाऊ नहीं हैं हम
वो बिक गए हैं चश्म-ए-ख़रीदार देख कर

शहर-ए-सुकूत का हूँ तलबगार दोस्तो
उकता चुका हूँ रौनक़-ए-बाज़ार देख कर

— Karan Bedi

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