सभी ने देखा बस चेहरा हमारा
किसी ने दिल नहीं देखा हमारा
नहीं टिक पाया इक रिश्ता हमारा
हमें ले डूबा ये ग़ुस्सा हमारा
तुम्हें हाँ की थी अच्छा सोच कर पर
ग़लत निकला है अंदाज़ा हमारा
जहाँ में बाँटता फिरता है वो इश्क़
जो होना चाहिए हिस्सा हमारा
मिले जब जिस्म आपस में हमारे
तो रिश्ता हो गया गहरा हमारा
बड़ी आसानी से बोला उन्होंने
'करन' अब कुछ नहीं लगता हमारा
— Karan Bedi















