कुछ तो बदले अल्फ़ाज़ थे कुछ तो बदले अहसास थेजो गुज़र गए शायदवो ही पल कुछ ख़ास थेजो रह रह के जल उठते थेवो मेरे जज़्बात थेजाने क्यूँ तू चला गयाजाने क्या तेरे आस थेहर लम्हे तुझे याद कियाजो भी मेरे पास थेबीते कल के क़िस्से थे सबज़िंदा थे कुछ लाश थेवक़्त करते आँख मिचौलीहम कितने बकवास थे— Bhavesh kumar