सब लोग कहानी में ही मशरूफ़ रहे थे
दरअस्ल अदाकार हक़ीक़त में मरे थे
जाते हुए कमरे की किसी चीज़ को छू दे
मैं याद करूँँगा कि तेरे हाथ लगे थे
आँखे भी तेरी फतह न कर पाये अभी तक
किस लम्हा ए बेकार में हम लोग बने थे
मैंने तो कहा था निकल जाते है दोनों
उस वक़्त कहानी में सभी लोग नए थे
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