koi insaan se nahin tujh se ye iqraar kiya | कोई इंसाँ से नहीं तुझ से ये इक़रार किया

  - Danish Balliavi

कोई इंसाँ से नहीं तुझ से ये इक़रार किया
ये ख़ता है कि ऐ जाँ हमने ही क्यूँ प्यार किया

नींद भी आती नहीं रात में हमको ऐ जान
प्यार में ख़ुद पे ही इन हाथों से ये वार किया

मिलते हैं हमको ये रुसवा के सिवा कुछ भी नहीं
इस क़दर हमने भी ये प्यार का इज़हार किया

तूने कर डाला है क़ब्ज़ा भी हमारे दिल पर
इस समंदर को ऐ जाँ तैर के ही पार किया

ये जो दानिश नहीं देता है किसी को भी दिल
तेरी ख़ातिर ही कई लोगों को इंकार किया

  - Danish Balliavi

Khwab Shayari

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