अपने लहजे से यहाँ भी कुछ इनायत कीजिए
नफ़रतों की महफ़िलों में अब मुहब्बत कीजिए
बेबसों के साथ होता है मुसलसल अब ग़लत
ज़ुल्म करने वालों से खुल कर बग़ावत कीजिए
भूख से कुछ मर रहे हैं लोग अपने मुल्क में
ऐ सियासी लोगों थोड़ी सी नदामत कीजिए
कब तलक ख़ामोश ही बैठे रहेंगे आप लोग
अपने रब से इस हुकूमत की शिकायत कीजिए
आप भी 'दानिश' ज़रा हालात देखें मुल्क के
इनकी ख़ातिर आप भी ग़ज़लों में ज़हमत कीजिए
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