ग़म-ए-ज़िंदगी से परेशान थे जोफ़क़त उन की ख़ातिर दुआ कर रहा थामेरी मौत पर हँस रहे हैं यहाँ लोगमैं जिन के लिए रात दिन मर रहा था— Danish Balliavi