अच्छा लगा तो कर लिया वर्ना नहीं किया
हम ने ब-ज़ोर कुछ भी गवारा नहीं किया
हम तो क़ुबूल करते रहे उस से जो मिला
हम ने ग़म-ए-हयात का शिकवा नहीं किया
दुनिया जो कहती थी वो किए जा रहे थे हम
अफ़्सोस आप ने जो कहा था नहीं किया
चुप-चाप ही चले गए वो कुछ कहे बग़ैर
झूटा भी लौट आने का वा'दा नहीं किया
क़िस्सा तुम्हारा सुन के यही पूछते हैं लोग
उस ने तुम्हारे साथ भी अच्छा नहीं किया
— Dharmesh Solanki















