मुझ सेे तू ये न पूछ कि क्या क्या दिखाई देसहरा सा हूँ मैं और वो दरिया दिखाई देउस का वो हुस्न हाए कि ता'रीफ़ क्या करूँआँखें जो बंद हों तो वो जल्वा दिखाई दे— Prateek Gora