pak gaii hain aadaten baaton se sar hongi nahin | पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं

  - Dushyant Kumar

पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं
कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं

इन ठिठुरती उँगलियों को इस लपट पर सेंक लो
धूप अब घर की किसी दीवार पर होगी नहीं

बूँद टपकी थी मगर वो बूंदों बारिश और है
ऐसी बारिश की कभी उन को ख़बर होगी नहीं

आज मेरा साथ दो वैसे मुझे मा'लूम है
पत्थरों में चीख़ हरगिज़ कारगर होगी नहीं

आप के टुकड़ों के टुकड़े कर दिए जाएँगे पर
आप की ताज़ीम में कोई कसर होगी नहीं

सिर्फ़ शाइ'र देखता है क़हक़हों की असलियत
हर किसी के पास तो ऐसी नज़र होगी नहीं

  - Dushyant Kumar

Nazar Shayari

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