मतलब का कोई शे'र सुनाएँ जहाँ-पनाह
हम सामईं पे क़हर न ढाएँ जहाँ-पनाह
बच्चों को भूके पेट सुलाने के बा'द हम
कैसे ग़ज़ल के शे'र सुनाएँ जहाँ-पनाह
हर सू बिखेरता हो बराबर सी रौशनी
ऐसा भी इक चराग़ जलाएँ जहाँ-पनाह
पर्दे के पीछे बैठ के खेलेंगे कब तलक
पर्दे के सामने भी तो आएँ जहाँ-पनाह
गर जान की अमाँ हो तो दरख़्वास्त है मिरी
फूलों को ख़ार से न मिलाएँ जहाँ-पनाह
— Ehya Bhojpuri















