घर बनाना बहोत ज़रूरी है
क़ैदखाना बहोत ज़रूरी है
फूल खिलने से फल उतरते हैं
मुस्कुराना बहोत ज़रूरी है
महफिलें बे-सबब नहीं जमती
एक फसाना बहोत ज़रूरी है
अब के दरवाज़ा ख़ुद सजाया है
तेरा आना बहोत ज़रूरी है
आ
समाँ में ज़मीन वालो का
इक ठिकाना बहोत ज़रूरी है
अब के वो बे-सबब ही रूठा है
अब मनाना बहोत ज़रुरी है
कितने जिंदा हैं हम, पता तो चला
ज़हर खाना बहोत ज़रुरी है
सर उठाने के वास्ते "फ़हमी"
सर झुकाना बहुत ज़रूरी है
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