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SHER
फ़क़त दो-चार ईदें और बढ़ा दे साल में या रब गले बाबा के लगने को बहाने चाहता हूँ मैं — Haider Khan
SHER
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे
Ali Zaryoun
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे — Ali Zaryoun
SHER
वैसे एक शिकवा था तुम सेे
अच्छा छोडो ईद मुबारक
Zubair Ali Tabish
वैसे एक शिकवा था तुम सेे अच्छा छोडो ईद मुबारक — Zubair Ali Tabish
SHER
ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन
इक उदासी भी साथ लाती है
Farhat Ehsaas
ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन इक उदासी भी साथ लाती है ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के जाने किस किस की याद आती है — Farhat Ehsaas
SHER
ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का
ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का
Unknown
ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का — Unknown
SHER
जिन रस्तों से तुम गुज़रे हो
उन रस्तों को ईद मुबारक़
Ritesh Rajwada
जिन रस्तों से तुम गुज़रे हो उन रस्तों को ईद मुबारक़ — Ritesh Rajwada
SHER
जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही
Amjad Islam Amjad
जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही — Amjad Islam Amjad
SHER
हर गीत में हर बार गाऊँगा तुझे
अपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझे
Krishnakant Kabk
हर गीत में हर बार गाऊँगा तुझे अपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझे तू ईद है और तू ही दीवाली मेरी मैं हर बरस यूँँही मनाऊँगा तुझे — Krishnakant Kabk
SHER
ईद का चाँद तुम ने देख लिया
चाँद की ईद हो गई होगी
Idris Azad
ईद का चाँद तुम ने देख लिया चाँद की ईद हो गई होगी — Idris Azad
SHER
न वैसा चाँद फिर निकला न वैसी ईद फिर आई
किसी ने जब मेरी ईदी मेरे होंटों पे रख दी थी
Ritesh Rajwada
न वैसा चाँद फिर निकला न वैसी ईद फिर आई किसी ने जब मेरी ईदी मेरे होंटों पे रख दी थी — Ritesh Rajwada
SHER
उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
Unknown
उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का — Unknown
SHER
हम ने तुझे देखा नहीं क्या ईद मनाएँ
जिस ने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक
Liyaqat Ali Aasim
हम ने तुझे देखा नहीं क्या ईद मनाएँ जिस ने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक — Liyaqat Ali Aasim
SHER
मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी
अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं
Unknown
मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं — Unknown
SHER
तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी
ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी
Zafar Iqbal
तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी — Zafar Iqbal
SHER
ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं
ईद का चाँद नज़र आने लगा ईद के बा'द
Unknown
ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं ईद का चाँद नज़र आने लगा ईद के बा'द — Unknown
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