रात के आने से ले कर रात के ढलने तलक

शम्अ' इक बुझती रही है मेरे घर जलने तलक

छोड़ कर जाने से पहले एक वा'दा कर ज़रा
तू रहेगी साथ में इक ग़म नया पलने तलक

देर लग सकती है तुझ को पास आने में मगर
थाम लेना हाथ मेरा हाथ के मलने तलक

— gabruu govind

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