jisko is fasl mein hona hai barabar ka shareek | जिसको इस फ़स्ल में होना है बराबर का शरीक

  - Ghulam Mohammad Qasir

जिसको इस फ़स्ल में होना है बराबर का शरीक
मेरे एहसास में तन्हाइयाँ क्यूँ बोता है

  - Ghulam Mohammad Qasir

More by Ghulam Mohammad Qasir

As you were reading Shayari by Ghulam Mohammad Qasir

    गलियों की उदासी पूछती है घर का सन्नाटा कहता है
    इस शहर का हर रहने वाला क्यूँ दूसरे शहर में रहता है
    Ghulam Mohammad Qasir
    अब उसी आग में जलते हैं जिसे
    अपने दामन से हवा दी हम ने
    Ghulam Mohammad Qasir
    19 Likes
    नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
    आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है
    Ghulam Mohammad Qasir
    23 Likes
    तुम यूँ ही नाराज़ हुए हो वर्ना मय-ख़ाने का पता
    हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे
    Ghulam Mohammad Qasir
    19 Likes
    ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
    कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है
    Ghulam Mohammad Qasir
    24 Likes

Similar Writers

our suggestion based on Ghulam Mohammad Qasir

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari