दिल-लगी को दिल-लगी से जीत जाने का हुनर
हम को आता ही नहीं है दिल लगाने का हुनर
वो महज़ कुछ दिन रहेगा फिर फ़ना हो जाएगा
तू जिसे बतला रहा है इस ज़माने का हुनर
ज़ीस्त को मिलता सुकूँ है गुनगुनाने से इसे
क्यूँ न हम को रास आए गीत गाने का हुनर
हो गया ख़ामोश मैं भी देख लो आ कर सभी
मर गया अल्फ़ाज़ को शीरीं बनाने का हुनर
साँप कुत्ते भेड़िए सब फ़ेल हैं सरवर यहाँ
दोस्तों से सीखिए अब काट खाने का हुनर
— Hameed Sarwar Bahraichi















