nadaamat men sadaqat ka hunar hota to kya hota | नदामत में सदाक़त का हुनर होता तो क्या होता

  - Hameed Sarwar Bahraichi

नदामत में सदाक़त का हुनर होता तो क्या होता
तेरे सीने में लोहे का जिगर होता तो क्या होता

कहेंगे लोग क्या क्या कुछ कभी ऐसा कभी वैसा
अगर इन बातों का मुझपर असर होता तो क्या होता

ग़रीबी में मरे थे हम अगर कुछ कर नहीं पाए
हमारे पास भी कुछ माल ओ ज़र होता तो क्या होता

डरे फिरते हैं हम इस मुल्क के फ़िरक़ा परस्तों से
अगर हम लोगों में उस रब का डर होता तो क्या होता

सभी की शायरी में है हक़ीक़त का अयाँ होना
मगर हम सा कोई शायर अगर होता तो क्या होता

  - Hameed Sarwar Bahraichi

Ilm Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Hameed Sarwar Bahraichi

As you were reading Shayari by Hameed Sarwar Bahraichi

Similar Writers

our suggestion based on Hameed Sarwar Bahraichi

Similar Moods

As you were reading Ilm Shayari Shayari