झूठ तो झूठ ही बताने दो
मत रखो दिल में बैर जाने दो
सब यहाँ चील सब यहाँ हैं गिद्ध
अपने ज़ख़्मों को आशियाने दो
जन्मदिन था मगर न आए तुम
हाँ चलो अब फ़ुलाँ बहाने दो
बात घर कर चुकी मेरे दिल में
अब वज़ाहत नहीं तराने दो
है शबिस्ताँ नहीं मुयस्सर तक
नींद मत दो शराब-ख़ाने दो
तुम समझ ही नहीं रहे मुझ को
ख़ैर छोड़ो न समझो जाने दो
— harshit karnatak















