जो है मेरे दिल में छुपाना नहीं है
मगर साफ़ तुम को बताना नहीं है
मुझे अलविदा कहने आए ही क्यूँ हो
गले से मुझे जब लगाना नहीं है
हमारा पता जान कर क्या करोगे
तुम्हें लौट कर अब जब आना नहीं है
मुझे बेचकर ग़म कमानी है दौलत
मेरे पास कोई ख़ज़ाना नहीं है
लगाओ न उम्मीद मुझ से ज़ियादा
मेरा कोई ख़ुद का ठिकाना नहीं है
पड़े रहने दो मुझ को उजड़े चमन में
मुझे अपने घर को बसाना नहीं है
ख़ता दिल ने की है तो दिल अपना भुगते
हमें फेफड़ों को जलाना नहीं है
गले लग के क्यूँ रो रहे हो मुसलसल
जो 'हस्साम' को कुछ बताना नहीं है
— Hassam Tajub















