पुरानी इक कहानी लिख रहा हूँ
कहाँ गुज़री जवानी लिख रहा हूँ
मेरे अश'आर में कुछ भी न मेरा
मैं बस उस की निशानी लिख रहा हूँ
बहुत गंदे चलन उस के हैं फिर भी
मैं उस को ख़ानदानी लिख रहा हूँ
हुआ क्या है मुझे कोई बताए
मैं क्यूँ पानी से पानी लिख रहा हूँ
वो जिस के इश्क़ ने शाइ'र बनाया
उसी की मेहरबानी लिख रहा हूँ
मेरी तक़दीर में शायद नहीं है
मैं जिस को दिल की रानी लिख रहा हूँ
मोहब्बत कर के देखा है तभी तो
मोहब्बत को मैं फ़ानी लिख रहा हूँ
— Hassam Tajub















