अगर तुम पे गुज़ारी ज़िंदगी है
बहुत अच्छी हमारी ज़िंदगी है
सितारा गिर गया चमके बिना ही
लगा छत से उतारी ज़िंदगी है
कहीं बैठी सुहागन के है जैसी
कहीं बैठी कुँवारी ज़िंदगी है
किसी बूढ़े के चेहरे की हो शिकने
पहन के यूँ उतारी ज़िन्दगी है
— habib kinkhabwala














