हमें भी वक़्त ने पत्थर सिफ़त बना डालाहमीं थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोगसितम तो ये कि हमारी सफ़ों में शामिल हैंचराग़ बुझते ही ख़ेमा बदलने वाले लोग— Iqbal Ashhar