हमारी ख़्वाहिशात हमारी ज़रूरियात की पैदावार हैं

ख़्वाहिशात की तकमील ख़ुशी देती है
और अदम-ए-तकमील रंज
ख़ुशी और रंज क्या है
हमारे अपने मिज़ाज की जम्अ-तफ़रीक़
क्या तुम ने कभी किसी के लिए मौत की ख़्वाहिश की है
मौत में एक ख़ुशी पोशीदा है
एक स्वार्थ निहित है
तुम्हारी ज़िंदगी स्वार्थ पे क़ाएम है
तुम जब भी मौत चाहोगे अपने स्वार्थ के लिए चाहोगे
यूँ कोई मौत को गले लगाता है

मैं सोचता हूँ
ज़िंदगी की साँसों ने
मेरे बदन को हिद्दत के सिवा क्या दिया है
धरती पर एक बोझ से ज़ियादा नहीं रहा है मेरा वजूद
आख़िर धरती कब तक मेरा बोझ बर्दाश्त करेगी
वक़्त आ गया है कि मौत मुझे गले लगा ले
मैं धरती का बोझ कम करना चाहता हूँ
या ज़िंदगी के बोझ से ख़ुद छुटकारा हासिल करना चाहता हूँ
मैं जानता हूँ
मेरी मौत से संसार अपनी रफ़्तार धीमी नहीं कर लेगा
वक़्त ठहर नहीं जाएगा
कि मैं किसी के लिए ज़िंदा नहीं था
और मेरी मौत भी
अपने लिए है
ख़ालिस अपने लिए

— Javed Nadeem

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