आख़िरत में उस से पूछा जाएगा
जिसके घर से कोई प्यासा जाएगा
चीख उठेगा तब पस-ए-मंज़र मिरा
जब किसी के दिल को तोड़ा जाएगा
पड़ता है तन्हा ख़ुदा तो यूँॅं समझ
इस जहॉं से कोई प्यारा जाएगा
सच को सच समझो वगरना एक दिन
झूठ ही को सच बताया जाएगा
कोई कुछ देता नहीं है मुफ़्त में
बाद में तुम सेे वसूला जाएगा
अस्पतालों में नहीं जाता ग़रीब
कहता है उसको निचोड़ा जाएगा
'इश्क़ तुमको हो गया है मान लो
कब तलक सच को छिपाया जाएगा
बाद मरने के सभी होते अछूत
लाश को छू कर नहाएा जाएगा
'इश्क़ होना है बला से हो तो हो
'इश्क़ अव्वल तो नकारा जाएगा
मैंने पूछा क्या मिरी याद आएगी
कह रही थी वो के देखा जाएगा
माना माह-ए-फ़रवरी है वस्ल-ए-यार
जू'न टूटे दिल से जाना जाएगा
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