ख़ुशनुमा है समॉं दौर कोई नहींसामने बैठे हैं ग़ौर कोई नहींया ख़ुदा अब कोई ऐसी महफ़िल भी होएक मैं एक वो और कोई नहीं— 'June' Sahab Barelvi