इश्क़ ले जाएगा उसी की तरफ़

मैं अगर भागा आशिक़ी की तरफ़

सुन के इक दूसरे की बातों को
चल पड़े दोनों ख़ामुशी की तरफ़

आप का साथ छूटा है जब से
बढ़ नहीं पाता ज़िंदगी की तरफ़

इश्क़ की राह से मुझे वो शख़्स
ले ही आएगा दोस्ती की तरफ़

बस सिवा उस हसीन चेहरे के
कुछ नहीं दिखता शा'इरी की तरफ़

इश्क़ आवाज़ देता है वरना
कौन जाता है ख़ुद-कुशी की तरफ़

— Sadik Ali Shadab

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