अब क्या बताऊँ इश्क़ में क्या क्या नहीं गया
ये समझो ख़ुद की लाश को काँधा नहीं गया
ता'उम्र जिन के वास्ते बीमार हम रहें
उन से हमारा हाल भी पूछा नहीं गया
कपड़े बदल के तितली मेरे साथ सो गई
कमरे से जुगनुओं का कबीला नहीं गया
क्या फ़ाइदा मिला मुझे फिर ऐसे इश्क़ का
मुझ पर तुम्हारा एक भी बेटा नहीं गया
— "Nadeem khan' Kaavish"















