बिखरा पड़ा था दर्द समेटा न जा सकामंज़र उस एक शाम का देखा न जा सकाक्या फ़ाइदा फिर ऐसी पढ़ाई का ऐ 'नदीम'मय्यत में अपने बाप की बेटा न जा सका— "Nadeem khan' Kaavish"