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Kanor
imdaad
imdaad | "इमदाद"
- Kanor
"इमदाद"
ग़मदीदा
शख़्स
कोई
गर
मदद
के
लिए
आवाज़
दे
उसके
ग़ुबार
कहे
ग़म
कहे
तुम
उस
की
आवाज़
सुनो
उसके
ग़म
सुनो
और
ख़ुशी
कहो
उस
सेे
एक
मजदूर
मिला
मुझे
उस
का
हाल
पहले
ऐसा
न
था
उस
की
फटी
कमीज़
में
हस्सास
की
बू
थी
मजबूरियों
में
घिरा
बेज़र
क्या
बताता
मुझे
क्या
कहता
सो
उसने
इतना
किया
मुझे
देख
कर
मुस्कुरा
दिया
मेरी
ग़ुज़ारिश
है
कि
तुम
कुछ
नायाब
करो
ख़ुश्क
में
आब
करो
काटों
की
जगह
गुलाब
करो
इतना
गर
न
हो
पाए
किसी
भूखे
को
सैराब
करो
कर
पाओगे
इतना
?
तुम
ने
भी
ख़ुदास
कभी
कुछ
माँगा
होगा
पूरा
भी
ख़ुदा
ने
किया
होगा
ये
बात
जानना
है
हमको
हर
बार
नहीं
होता
है
वो
वो
हम
ही
है
करने
वाले
ख़ाली
जगह
भरने
वाले
कुछ
तो
हमको
करना
होगा
ख़ुदा
गोया
बनना
होगा
- Kanor
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